ट्रंप का एक बयान और हिल गया तेल बाजार: 7% गिरा क्रूड, लेकिन आग तो …

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

वैश्विक तेल बाजार अक्सर मिसाइलों और बयानबाजी के बीच सांस लेता है. इस बार बाजार की धड़कन एक बयान से तेज हुई.
जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने फ्लोरिडा में कहा कि पश्चिम एशिया का युद्ध “जल्द खत्म हो सकता है”, तो दुनिया के ट्रेडिंग स्क्रीन पर जैसे किसी ने अचानक ब्रेक लगा दिया.
जो तेल सोमवार को तीन साल के शिखर पर चढ़ गया था, वही अगले दिन ढलान पर फिसलता नजर आया. लेकिन सवाल वही है जो युद्धों की दुनिया में हमेशा रहता है. क्या बयान सच में शांति लाते हैं, या यह सिर्फ बाज़ार को कुछ घंटों की राहत देने वाला राजनीतिक मौसम बुलेटिन है?

ट्रंप की भविष्यवाणी और तेल बाजार का अचानक यू-टर्न

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर के आसपास पहुंच गई थीं. लेकिन ट्रंप के बयान के बाद बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.

  • Brent crude लगभग 7.2% गिरकर 91.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया
  • WTI crude भी गिरकर 88.51 डॉलर के आसपास बंद हुआ

युद्ध खत्म होने की उम्मीद ने सप्लाई संकट के डर को कुछ समय के लिए शांत कर दिया. बाजार की भाषा में कहें तो ट्रेडर्स ने अचानक “घबराहट की खरीदारी” से हाथ खींच लिया.

ट्रंप-पुतिन कॉल: बाजार के पीछे की असली कहानी

इस गिरावट के पीछे सिर्फ बयान नहीं बल्कि एक फोन कॉल भी चर्चा में है. ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin के बीच लगभग एक घंटे तक बातचीत हुई. क्रेमलिन के अनुसार चर्चा “रचनात्मक” रही. पुतिन ने साफ चेतावनी दी कि यदि युद्ध और बढ़ा तो Strait of Hormuz से गुजरने वाली तेल सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है.

यह वही जलडमरूमध्य है जहां से दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. यानी अगर यहां जाम लगा, तो दुनिया के पेट्रोल पंपों तक असर पहुंचेगा.

ईरान का पलटवार: युद्ध अभी खत्म नहीं

जहां एक तरफ शांति की बातें हो रही हैं, वहीं युद्ध के मैदान से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आ रही है. ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम तबाह हो चुका है. इसके उलट ईरान ने भारी पेलोड और एक टन से ज्यादा वजन वाले वारहेड वाली मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है.

इससे साफ संकेत मिलता है कि जमीन पर तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है.

तेहरान में सत्ता बदलाव और बढ़ती सख्ती

ईरान की राजनीति भी इस संकट के बीच बदलती दिख रही है. देश के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को नया सर्वोच्च नेता बनाया गया है.

इस फैसले पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इससे तेहरान की नीति और आक्रामक हो सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन अक्सर संकट के दौर में नीति को और कठोर बना देता है.

युद्ध की चेतावनी अभी भी कायम

अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने चेतावनी दी है कि ईरान अब तक के सबसे भीषण हमलों का सामना कर सकता है. ट्रंप ने भी स्पष्ट कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोकने की कोशिश की तो अमेरिका पूरी सैन्य ताकत से जवाब देगा.

यानी तस्वीर बेहद विरोधाभासी है एक तरफ कूटनीति दूसरी तरफ युद्ध की तैयारी और इसी दोराहे पर खड़ा है वैश्विक तेल बाजार.

पाकिस्तान में पेट्रोल 321 रु., PM से पूछा – ट्रंप से रियायत क्यों नहीं?

Related posts

Leave a Comment